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Piyush Goyal asks exporters to leverage FTAs to boost shipments, expand market reach – Moneycontrol.com

Piyush Goyal asks exporters to leverage FTAs to boost shipments, expand market reach – Moneycontrol.com — editorial illustration

Piyush Goyal asks: Piyush Goyal asks exporters to leverage FTAs to boost shipments, expand market reach  Moneycontrol.com

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश के निर्यातकों से आह्वान किया है कि वे वैश्विक बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने और देश के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का पूरा लाभ उठाएं। लेवरेज FTAs to boost की रणनीति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारियों को पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में अपनी पहुंच का विस्तार करना चाहिए। यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने निर्यात आधार को विविधतापूर्ण बनाने और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

लेवरेज FTAs to boost निर्यातकों के लिए क्यों जरूरी है?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यातकों के साथ हुई बैठकों और मंचों पर इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सरकार द्वारा दुनिया के कई प्रमुख देशों और ब्लॉकों के साथ जो मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं, उनका पूरा उपयोग अभी तक व्यापारिक समुदाय द्वारा नहीं किया जा रहा है। इन समझौतों के तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी छूट या शून्य शुल्क की सुविधा मिलती है, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं।

मंत्री ने निर्यातकों को प्रोत्साहित किया कि वे इन समझौतों के प्रावधानों को बारीकी से समझें और अपनी रणनीतियों को उसके अनुसार ढालें। इससे न केवल विदेशों में भारतीय सामान की मांग बढ़ेगी, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

वैश्विक बाजारों में विस्तार और विविधीकरण

भारतीय निर्यातकों के लिए यह समय पारंपरिक बाजारों जैसे अमेरिका और यूरोपीय संघ पर निर्भरता कम करने और नए भौगोलिक क्षेत्रों की ओर देखने का है। सरकार का मानना है कि लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, और आसियान देशों जैसे नए बाजारों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका दोहन किया जाना बाकी है।

निर्यातकों को सलाह दी गई है कि वे केवल तैयार माल के निर्यात तक सीमित न रहें, बल्कि उच्च मूल्य वर्धित (value-added) उत्पादों और आधुनिक तकनीकों से जुड़े सामानों का उत्पादन बढ़ाएं। इससे वैश्विक बाजार में भारत की एक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में छवि और मजबूत होगी।

व्यापार समझौतों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच बाधाओं को दूर करना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई बार निर्यातकों को प्रक्रियागत जटिलताओं, नियमों के अनुपालन (compliance) और प्रमाणन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

वाणिज्य मंत्रालय इन चुनौतियों को दूर करने के लिए लगातार उद्योग संघों के साथ संपर्क में है और प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि कारोबारी सुगमता (ease of doing business) को और बढ़ावा मिल सके।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और अपेक्षाएं

पीयूष गोयल के इस आह्वान का निर्यातकों और व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें, तो भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए गए महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सकता है।

व्यापारियों ने हालांकि यह भी उल्लेख किया है कि रसद (logistics) लागत को कम करना और वित्तपोषण (credit availability) को आसान बनाना इस दिशा में दो सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं। जब तक छोटे निर्यातकों को सस्ती दरों पर कर्ज और समय पर लॉजिस्टिक्स सहायता नहीं मिलती, तब तक वे वैश्विक स्तर पर पूरी ताकत से मुकाबला नहीं कर पाएंगे।

अब तक क्या अनिश्चित है?

हालांकि सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से निर्यात बढ़ाने का स्पष्ट रोडमैप दिया है, लेकिन कुछ पहलू अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं:

भविष्य में होने वाले नए व्यापार समझौतों की सटीक समयसीमा और उनमें शामिल होने वाले विशिष्ट क्षेत्रों की अंतिम सूची अभी आधिकारिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

वैश्विक मंदी की आशंकाओं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मांग की स्थिति का आगामी तिमाहियों में भारतीय निर्यात पर कितना और किस प्रकार का प्रभाव पड़ेगा, यह पूरी तरह से अनिश्चित है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रेट दरों (shipping freight rates) में उतार-चढ़ाव का भविष्य का रुख कैसा रहेगा, इस पर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

मुख्य बातें और निष्कर्ष (Reader Takeaways)

व्यापार समझौते: भारतीय निर्यातक वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

बाजार का विस्तार: पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ नए और उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रुख करने की आवश्यकता है।

मूल्य वर्धन: केवल मात्रा बढ़ाने के बजाय उच्च गुणवत्ता और मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्यात पर जोर दिया जाना चाहिए।

सहयोग: सरकार और उद्योग जगत को मिलकर रसद और वित्तपोषण से जुड़ी बाधाओं को दूर करना होगा।

स्रोत: news.google.com

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