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23 October 2028: Forget iPhone Duo, Ashwini Vaishnaw says India will have its own Apple and Samsung moment – The Economic Times

भारत में कार खरीदने के फैसले: अब ब्रांड से ज्यादा टेक्नोलॉजी को मिल रही है अहमियत – रिपोर्ट — editorial illustration

23 October 2028:: 23 October 2028: Forget iPhone Duo, Ashwini Vaishnaw says India will have its own Apple and Samsung moment  The Economic Times

भारत के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में भविष्य को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि देश में जल्द ही एक ऐसा दौर आएगा जो वैश्विक दिग्गजों जैसे ऐपल और सैमसंग के मुकाम की बराबरी करेगा। इस बयान में एप्पल और सैमसंग जैसे ब्रांडों की तरह भारतीय बाजार और विनिर्माण क्षमताओं के उभरने की बात कही गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह घोषणा हाल ही में द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें भारत के बढ़ते तकनीकी परिदृश्य पर प्रकाश डाला गया है।

मुख्य समाचार सारांश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत अब केवल पश्चिमी या अन्य देशों की तकनीक का आयातक नहीं रह गया है, बल्कि यह खुद एक प्रमुख उत्पादक और विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की घरेलू नीतियों, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं और तकनीकी नवाचारों के दम पर भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है।

भारत का तकनीकी और औद्योगिक परिदृश्य

पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन में भारत ने आयात पर निर्भरता कम की है। वैश्विक कंपनियां अब भारत में अपने प्लांट लगा रही हैं और स्थानीय स्तर पर उत्पादन कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिल रहा है।

ऐप्पल और सैमसंग जैसा मुकाम हासिल करने की दिशा

वैश्विक बाजार में एप्पल और सैमसंग का दबदबा उनकी अत्याधुनिक तकनीक, मजबूत सप्लाई चेन और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण है। भारत इसी मॉडल को अपनाते हुए अपने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को मजबूत कर रहा है। सरकार का यह विजन केवल असेंबलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण और उच्च-स्तरीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) में भी देश को आत्मनिर्भर बनाना है।

सेमीकंडक्टर मिशन और घरेलू विनिर्माण

इस पूरी प्रगति के केंद्र में भारत का महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर मिशन है। किसी भी देश को स्वतंत्र और मजबूत तकनीकी ताकत बनने के लिए चिप निर्माण में आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में भारी निवेश आकर्षित किया है, जिससे आने वाले समय में देश में ही अत्याधुनिक माइक्रोचिप्स का उत्पादन संभव हो सकेगा।

आर्थिक और रोजगार पर प्रभाव

घरेलू स्तर पर उन्नत तकनीकी विनिर्माण बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि के साथ-साथ इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह कदम भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बना रहा है।

अब तक क्या असत्यापित या अनिश्चित है

हालांकि सरकारी नीतियां और उद्योग के आंकड़े सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, फिर भी यह देखना बाकी है कि कोई पूरी तरह से भारतीय ब्रांड वैश्विक स्तर पर एप्पल और सैमसंग को सीधी टक्कर कब और कैसे दे पाएगा। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर चिप निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अभी कई तकनीकी और ढांचागत चुनौतियों को पार करना शेष है।

पाठकों के लिए मुख्य बातें (Key Takeaways)

स्रोत: news.google.com

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